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हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता)

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हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता)  रेडियो कार्बन c14 जैसी नवीन विश्लेषण पद्धति के आधार पर सिंधु सभ्यता की सर्वमान्य तिथि 2500 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व मानी गई है यह नगरीकृत तथा कांस्य युगीन सभ्यता थी  हड़प्पा सभ्यता का विस्तार उत्तर में मांडा ( जम्मू कश्मीर, चिनाब नदी),  दक्षिण में दैमाबाद ( महाराष्ट्र,  प्रवारा नदी), पूर्व में आलमगीरपुर ( मेरठ, हिंडन नदी) तथा पश्चिम में सुत्कागेंडोर ( बलूचिस्तान, दशक नदी ) तक था  स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात हड़प्पा सभ्यता के सर्वाधिक स्थल गुजरात में खोजे गए हैं नगर निर्माण योजना  सिंधु घाटी की प्रमुख विशेषताएं इसकी नगर निर्माण योजना है नगर ग्रीड पद्धति पर बसे थे तथा सड़क के एक दूसरे को समकोण पर काटती थी  धोलावीरा एक ऐसा नगर था जो तीन भागों में विभाजित था दुर्ग मध्य नगर और निचला नगर  कालीबंगा का अर्थ है काले रंग की चूड़ियां कालीबंगा एकमात्र हड़प्पा कालीन स्थल था जिसका निचला शहर भी दीवार से घिरा हुआ है  कालीबंगा से अलंकृत तथा लकड़ी की नाली के सशय  से मिले हैं  चन्हुदड...

रजिया सुल्तान (1236 से 1240) , बहराम शाह (1240 से 1242) , नसीरुद्दीन मुहम्मद (1246 से 1265)

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रजिया सुल्तान (1236 से 1240)  रुकनुद्दीन फिरोज के विरुद्ध जनता एवं कुछ अमीरों का समर्थन पाकर रजिया गद्दी हासिल करने में कामयाब रही।  रजिया बेगम प्रथम मुस्लिम महिला थी जिसने शासन की बागडोर संभाली।  अबीसीनेआई गुलाम या कोर्ट को अमीरे ए आखून  के पद पर नियुक्त किया।  रजिया ने तबरहिंद के इक्तादार अल्तूनिया से विवाह किया।  अक्टूबर 1240 में कैथल में रजिया की डाकुओं द्वारा हत्या करवा दी गई।  बहराम शाह (1240 से 1242) बहराम शाह के काल में 'नयाव ए मामलिकात' का पद पहली बार लिया गया।  1241 में पहली बार दिल्ली सल्तनत को मंगोलो का आक्रमण झेलना पड़ा।  1242  में बहराम शाह की मृत्यु हो गई।  इसके पश्चात अलाउद्दीन मसूदशाह 1242 से लेकर 1246 तक शासन करते रहे।  नसीरुद्दीन मुहम्मद (1246 से 1265)  बलबन की सहायता से नसीरुद्दीन महमूद ने गद्दी प्राप्त की यह बलबन का दमाद था।  बलबन  'नयाव ए मामलिकात' के पद पर नियुक्त हुआ था।